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श्री दूधेश्वर महातम्य                                                                                                                               English Version

भगवान् श्री दूधेश्वर की महिमा अपरम्पार है | स्वयं उनका कथन है कि यहाँ मेरा परमपावन मोक्षदायक एवं कल्याणकारी लिंगस्वरूप सदैव विद्यमान रहता है ,जिसकी पूजा से भक्तों को सांसारिक क्लेशों से नि:संदेह मुक्ति मिलती है | जो भगवान् श्री दूधेश्वर का ,उनके अद्वितीय विग्रह-लिंग के समक्ष स्मरण करता है और उनके मंदिर की परिक्रमा करता है उसे निश्चय ही शिवलोक की प्राप्ति होती है और परमपद मोक्ष मिलता है |

भगवान् श्री दूधेश्वर का दर्शन-पूजन –अभिषेक तो मनोकामना पूर्ण करने वाला है ही , साथ ही मठ-मंदिर से जुड़े परम तपस्वी सिद्ध ,संतों तथा श्रीमहंतों की समाधियों पर नित्यप्रति जल –पुष्पादि अर्पण करने से भी निरोगी काया ,प्रचुर मात्रा में धन .ऐश्वर्य .वाक् सिद्धि आदि फल प्राप्त होते हैं | शुद्ध आचरण युक्त एवं पवित्र तन-मन से श्री दूधेश्वर का स्मरण –पूजन –अभिषेक करने वाले विश्वासी एवं श्रद्धालुओं के लिये कुछ भी अलभ्य नहीं है | भगवान् श्री दूधेश्वर दूर से भी की गई दु:खी की आर्त पुकार सुन लेते हैं | उन्हें चालीस दिन,सोलह सोमवार,श्रावण मास शिवरात्रि में व्रत-पूजा-अभिषेक व अनुष्ठान से प्रसन्न किया जा सकता है |

श्री दूधेश्वर पूजा-विधान

सिद्धपीठों ,शक्तिपीठों ,ज्योतिर्लिंगों और सामान्य देवालयों –शिवालयों में पूजन-विधान एक सा नहीं है | स्थान विशेष पर पूजा-विधानों में विशेषताएँ व भेद देखे जाते हैं | भीड़ वाले विशेष अवसरों पर व सामान्य दिनों की पूजा-विधि में भी अंतर होता है | वास्तव में देव पूजन तो श्रद्धा से ही फलदायी होता है | चौसठ उपचार से पूजा करें और श्रद्धा .ध्यान व एकाग्रता का अभाव हो तो पूजा का विशेष फल अप्राप्य ही रहता है | श्रद्धालु भक्तों को पूजन की विधि से पूर्व यह अवश्य जान लेना चाहिए की भगवत कृपा उसी को प्राप्त होती है जो ऐसे स्थान पर दूसरों का भी अपने समान ही ध्यान रखे | सिद्धपीठ या तीर्थ स्थलों में जब भी पूजा करने पहुंचें तो यह ध्यान रहे कि आपके पीछे पूजा करने वालों की भारी भीड़ है और सभी को समय से पूजा करनी है | इसी परहित ख्याल है जो वैद्यनाथ धाम व पुरा महादेव मंदिर में कांवड़ियों को दूर से ही कांवड़ चढाने की प्रेरणा देता है | चंडी देवी ,मनसा माता ,कोलकाता की माँ काली ,वैष्णो देवी ,चिंतपूर्णी एवं ज्योतिर्लिंगों के दर्शन-पूजन करने जाने वालों को ,बाला जी के दर्शनार्थियों को ,दूर से से ही दर्शन कर पूजन –सामग्री पुजारियों को देकर ही सन्तोष प्राप्त करना पड़ता है कि हमारी पूजा स्वीकार हो गई और देव कृपा से उनकी मनौती भी पूर्ण होती है | जिस देव की जहाँ पूजा हो रही है उस स्थान विशेष के विधान का पालन भी अवश्य होना चाहिए तभी पूजा भी फलित होगी |

भगवान् दूधेश्वर के भक्त भाग्यशाली हैं कि उन्हें गर्भगृह में प्रवेश सुलभ है तथा वहाँ भगवान् दूधेश्वर महादेव की पूजा स्वयं करने की सुविधा मिलती है | अब भक्तों का भी यह कर्तव्य है कि वे दुसरे भक्तों को भी पूजा-अर्चना करने में सहयोग दें | कम-से-कम  समय में दूधेश्वर भगवान् का पूजन-अर्चन करके वे मुख्य मंदिर से बाहर निकलते चलें तो दुसरे श्रद्धालु भी समय से पूजा के सुअवसर का लाभ पा सकेंगे | मुख्य –मंदिर में जल-फूल –दक्षिणा आदि अर्पण कर ;धुपबत्ती .ध्यान ,स्तुति-पाठ आदि धूने या अन्य नियत स्थान या शिव –विग्रह के पास करना अधिक एकाग्रता से सम्भव हो सकेगा | पूजा में शान्ति का विशेष महत्त्व बताया गया है और इसीलिये भगवान् दूधेश्वर महादेव के मुख्य मंदिर में सूक्ष्म –पूजा का विधान बनाया गया है | पूजा –विधि को पूरी तरह अपनाकर श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल प्राप्त हो इसी  प्रार्थना के साथ विधि -क्रम पूजा के विवरण सहित निम्न प्रकार से है--

1.दूधेश्वर नाथ महादेव के मुख्य मंदिर के बाहर विराजमान नन्दी प्रतिमा को केवल प्रणाम निवेदन करें ,उन पर दूध-जल-फल-फूल आदि न चढ़ाये |

2.मंदिर में प्रवेश कर क्रम से श्री गणेश ,माता पार्वती एवं कार्तिकेय की पूजा करें ;इसके बाद भगवान् दूधेश्वर का दूध ,जल से अभिषेक करें ,फूल-फल-मिष्ठान्न –नारियल व दक्षिणा चढ़ाएं | पूजा में दक्षिणा का विशेष महत्त्व है |यज्ञ –पत्नी दक्षिणा के बिना कोई भी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती |

3. गणेश  जी की पूजा ‘श्री गणेशाय नम:’ मन्त्र से करें | पार्वती माता की पूजा ‘श्री पार्वत्यै नम: के साथ करें | कार्तिकेय की पूजा ‘श्री कर्तिकेयाय नम:’ से करें | भगवान् दूधेश्वर की पूजा ‘नम:शिवाय ,शिवाय नम: अथवा श्री दुधेश्वराय नम:’ से करें |

4. शिव परिवार को प्रणाम कर मंदिर से बाहर आ जायें |

5. मुख्य मंदिर के निकास द्वार के पास नियत स्थान पर ही धूपबत्ती –दीपक व अगरबत्ती जलायें

6.मंदिर के बाईं ओर सिद्ध –संतों की समाधियों पर भी दूध-जल-फल-फूल एवं दक्षिणा अर्पण करें | मन्त्र है ----‘नम: शिवाय’ | पीपल पर जल चढ़ायें |भगवान सूर्य नारायण को जल अर्पण करें |

7. माता गंगा जी की पूजा ‘श्री गंगायै नम:’ से करें  |

8. गुरु-गददी  धूना की पूजा ‘श्री गुरुवे नम:’ से करें |

9.भगवान् दत्तात्रेय की पूजा ‘श्री दत्तात्रेयाय नम: से करें |

10. माता भगवती की पूजा ‘नम:शिवायै  या शिवायै नम: से करें |

11.ठाकुरद्वारे में श्री लक्ष्मी-गणेश  जी की पूजा ‘श्री लक्ष्म्यै नम:,श्री गणेशाय नम: ‘ से करें |

12.माता अन्नपूर्णा जी की पूजा ‘श्री अन्नपूर्णायै नम: ‘मन्त्र से करें |

13 महामाया बगलामुखी की पूजा ‘श्री बगलामुख्यै नम:’ मन्त्र से करें |

14.’श्री गुरु द्रोणाय नम: से गुरु द्रोणाचार्य की पूजा करें |

15.’श्री शंकराचार्याय नम: ‘से आद्य गुरु शंकराचार्य जी की पूजा करें |

16.’श्री  गौरी गिरिये नम:’ से परम पूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत गौरी गिरी जी महाराज का पूजन करें |

17.’श्री परशुरामाय नम:’ से भगवान् परशुराम जी का पूजन करें |

18.’श्री गौतमाय नम:’ से महर्षि गौतम जी का पूजन करें |

19.’श्री सत्य नारायणाय नम: ‘मन्त्र से भगवान् सत्यनारायण जी का पूजन करें |
20. प्राचीन कुआँ की पूजा-परिक्रमा ‘श्री भवाय नम: या वरुणाय नम:’मन्त्र से करें |

21.’श्री दुर्गायै नम:’मन्त्र से भगवती दुर्गा माँ की पूजा तथा परिक्रमा करें |

22.श्री राधाकृष्णाभ्याम नम:’ से श्री राधा-कृष्ण की पूजा –परिक्रमा करें |

23.श्री राम –दरबार की पूजा ‘श्री हनुमते नम:,श्री लक्ष्मणाय नम:,श्री सीतारामाभ्याम नम:’ से करें | परिक्रमा भी करें |

24.’श्री हनुमते नम:’ से श्री हनुमान जी का पूजन करें |

25.वेद माता श्री गायत्री जी की पूजा ‘श्री गायत्र्यै नम: से करें |

26.श्री महाकाली माता की पूजा ‘श्री कालिकायै नम:’ से करें|

27. ‘श्री गणेशाय नम:,श्री पार्वत्यै नम:,श्री शंकराय नम:’ से सपरिवार शंकर-पूजन करें |

28. ‘ऐं सरस्वत्यै नम:’मन्त्र से माता सरस्वती जी का पूजन करें |

29. ‘श्री संतोषी देव्यै नम:’ से माँ संतोषी जी की पूजा करें |

30 . ‘हं हनुमते नम:’ से हनुमान जी महाराज का पूजन करें |

31.गददी से प्रसाद-चरनामृत लेकर नवग्रह मंदिर में पूजा के लिये जायें | ‘श्री गणेशाय नम:’से गणेश जी का पूजन कर नवग्रह की पूजा करें |

32. नवग्रह की पूजा  ‘ह्रीं सूर्याय नम:,सों सोमाय नम:, अं अंगारकाय नम:या मं मंगलाय नम:, बुं बुधाय नमः ,ब्रं ब्रह्स्पत्ये नमः ,शुं शुक्राय नमः ,शं शनेश्चराय नमः ,रां राहवे नमः व कें केतवे नमः ‘मन्त्रों से करें | नौ- ग्रहों की कम-से-कम नौ परिक्रमा अवश्य करें  |

33. गौशाला में गौ-माता के दर्शन करके घर जायें | गौ-माता के दूध से ही भगवान् दूधेश्वर प्रकट हुए हैं ,अत: भगवान् दूधेश्वरनाथ महादेव की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिये गौ-दर्शन अवश्य करें |

महान सिद्ध संत

श्री दूधेश्वरनाथ महादेव मठ मंदिर प्रारम्भ से ही अनेक सिद्ध –संतों की तपस्थली रहा है |

अलौकिक संत गरीब गिरी जी महाराज ,तपोमूर्ति बाबा इलायची गिरी जी महाराज ,सिद्ध बाबा गुजरान गिरी जी महाराज ,सिद्ध संत नारायण गिरी जी महाराज ,सिद्ध बाबा कैलाश गिरी जी महाराज ,सिद्ध बाबा गंगा गिरी जी महाराज ,सिद्ध योगी एतबार गिरी जी महाराज , सिद्ध संत बुद्ध गिरी जी महाराज ,पूज्य बाबा दौलत गिरी जी महाराज ,बंगाली बाबा नित्यानंद गिरी जी महाराज मठ की इस परम्परा के वाहक रहे हैं

गौरवशाली समृद्ध श्रीमहंत परम्परा

ऐतिहासिक सिद्ध पीठ श्री दूधेश्वरनाथ महादेव मठ मंदिर की श्रीमहंत परम्परा अति प्राचीन एवं समृद्धशाली है | इस परम्परा में ऐसे-ऐसे सिद्ध संत-महात्मा हुए हैं ,जिन्होंने न केवल मंदिर के उत्थान के लिये कार्य किया बल्कि आध्यात्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र में ऐसे अभूतपूर्व कार्य किये जो आम आदमी को अचंभित कर देने वाले हैं |

लगभग 560 वर्ष पूर्व ज्ञात प्रथम श्रीमहंत वेणी गिरी जी महाराज से लेकर वर्तमान श्रीमहंत नारायण गिरी जी महाराज तक समस्त सोलह श्रीमहंत विद्वान,सहज और मठ के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव रखने वाले हुए हैं | कहते हैं कि प्रथम श्रीमहंत वेणी गिरी जी से लेकर तेरहवें श्रीमहंत शिव गिरी जी महाराज तक सभी सोना बनाने की कला में सिद्धहस्त थे |

यह भी किसी से छिपा नहीं है कि भगवान् दूधेश्वर अपने जिस भक्त पर अति प्रसन्न होते हैं ,उसे स्वर्ण प्रचुर मात्रा में मिलता है | ऋषि विश्वेश्रवा और रावण को भी तो दूधेश्वर की पूजा-अर्चना से ही सोने की लंका प्राप्त हुई थी | इतिहास गवाह है कि भगवान् दूधेश्वर की कृपा और मठ के सिद्ध संत-महंतों के निर्मल आशीर्वाद से लाखों लोग कष्टों से मुक्ति पा चुके हैं | यह सिलसिला त्रेता युग से आज तक निरंतर जारी है |

श्री श्री 1008 श्रीमहंत वेणी गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1511 से 1568
श्री श्री 1008 श्रीमहंत संध्या गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1568 से 1600
श्री श्री 1008 श्रीमहंत प्रेम गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1600 से 1649
श्री श्री 1008 श्रीमहंत अधीन गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1649 से 1680
श्री श्री 1008 श्रीमहंत राज गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1680 से 1707
श्री श्री 1008 श्रीमहंत धनी गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1707 से 1743
श्री श्री 1008 श्रीमहंत दया गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1743 से 1785
श्री श्री 1008 श्रीमहंत पलटू गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1785 से 1830
श्री श्री 1008 श्रीमहंत सोमवार गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1830 से 1874
श्री श्री 1008 श्रीमहंत वसंत गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1874 से 1915
श्री श्री 1008 श्रीमहंत निहाल गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1915 से 1965
श्री श्री 1008 श्रीमहंत मंगल गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1965 से 1977
श्री श्री 1008 श्रीमहंत शिव गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1977 से 1991
श्री श्री 1008 श्रीमहंत गौरी गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 1991 से 2038
श्री श्री 1008 श्रीमहंत राम गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 2034 से 2044
श्री श्री 1008 श्रीमहंत नारायण गिरी जी महाराज --- विक्रम सम्वत् 2043 से वर्तमान

सिद्धपीठ दूधेश्वर नाथ मठ मंदिर से सम्बंधित अन्य मंदिर व आश्रम

1. श्री हनुमान मंदिर ,चौपला ,अग्रसेन बाज़ार ,गाज़ियाबाद (उ ०प्र०)
2. श्री स्वयंभू काल भैरव मंदिर ,प्रेम नगर ,गाज़ियाबाद (उ ०प्र०)
3. श्रीमहंत राम गिरी औषधालय ,जस्सीपुरा ,गाज़ियाबाद (उ ०प्र०)
4. श्री कृपा नन्द आश्रम ,धूम मानिकपुर ,गौतमबुद्ध नगर , (उ ०प्र०)
5. श्री ज्वालागिरी आश्रम ,माधव चौक ,ट्रान्सपोर्ट नगर ,मेरठ (उ ०प्र०)
6. श्री शिव मंदिर ,फरुखनगर ,गाज़ियाबाद (उ ०प्र०)
7. श्री नित्यानंद आश्रम ,परिक्रमा मार्ग ,वृन्दावन ,मथुरा(उ ०प्र०)
8. श्री राधा-कृष्ण गौशाला ,साठा ,नगला-सामना ,धौलाना ,हापुड़(उ ०प्र०)
9. श्री शिव मंदिर ,फेज-1,मोती बाग ,नई दिल्ली
10. श्री महामाया जगद्जननी कुलदेवी आरोग्य धाम ,मड़वा ,छपारा ,सिवनी (म०प्र०)
11. श्री दूधेश्वर मठ मंदिर ,तेलवाडा ,राजस्थान
12. श्री हनुमान मंदिर ,रेलवे स्टेशन ,सहारनपुर (उ०प्र०)
13. श्री शिव मंदिर ,आरोन ,राघवगढ़ ,गुना(म०प्र०)

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