श्रीमहंत नारायण गिरी जी Facebook

                                        पश्चिमी उत्तर प्रदेश का गौरव –श्री दूधेश्वर वेद विद्यापीठ

                          

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एकमात्र स्वयंभू हिरण्यगर्भ ज्योतिर्लिंग सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ मन्दिर,गाज़ियाबाद (उ०प्र०) के वर्तमान पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरी जी के अथक प्रयासों से मंदिर परिसर में 17,मई 2002 ,अक्षय तृतीया कोी दूधेश्वर वेद विधापीठ की विधिवत स्थापना की गई | जिसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है | जिसमें 6 वर्षीय पाठ्यक्रम के माध्यम से वर्तमान में उत्तर-मध्यमा तक की शिक्षा गुरुकुल पद्धति के माध्यम से विद्वान् आचार्यों द्वारा प्रदान की जा रही है ,उच्च शिक्षा (शास्त्री व आचार्य) की मान्यता के लिये विधालय प्रशासन प्रयासरत है | विधापीठ में देश के विभिन्न क्षेत्रों से विधार्थी शिक्षा प्राप्त करने आ रहे हैं | वर्तमान में विभिन्न कक्षाओं में लगभग 75 विधार्थी वेदाध्यन्न के साथ ही आधुनिक विषयों का भी अध्यन्न कर रहे हैं –ऋग्वेद ,यजुर्वेद ,सामवेद ,संस्कृत ,व्याकरण ,अंग्रेजी ,गणित ,कम्पयूटर आदि का सुचारू रूप से सुयोग्य विद्वान आचार्यों के द्वारा कराया जा रहा है | छात्रों को भोजन ,वस्त्र ,आवास आदि की व्यवस्था मंदिर समिति की ओर से नि:शुल्क उपलब्ध करायी जा रही है | छात्रों के समुचित विकास के लिये देश के मूर्धन्य विद्वानों को विशेष व्याख्यानों के लिये भी समय-समय पर आमंत्रित किया जाता है , यथा-- गुरुकुल कांगड़ी महाविधालय के कुलपति डा० योगेश शास्त्री जी,महर्षि वेद विधालय के कुलपति डा० ज्ञानेन्द्र महापात्र जी,श्री नरेंदर कापरे जी,श्री बाल चन्द्र भट्ट जी,श्री व्यंकटेश्वर दामले जी ,श्री राजशेखर जी ,आदि |

महर्षि सान्दिपनी वेद विधालय ,उज्जैन द्वारा वेद विषयों की परीक्षा के साथ ही श्री सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविधालय ,काशी द्वारा भी परीक्षा करायी जाती है | मंदिर परिसर में ही विधालय होने से विधार्थीयों को शिक्षा के साथ ही आध्यात्मिक वातावरण स्वत: ही मिल जाता है ,जहाँ प्रत्येक सोमवार तथा अन्य विशेष अवसरों पर रुद्राभिषेक ,चंडी यज्ञ आदि अनुष्ठान निरंतर होते रहते हैं | जिनमें विद्यार्थियों की सहभागिता अनिवार्य है | शारीरिक स्वास्थ्य के लिये छात्रों को प्रतिदिन योगासन तथा मन की स्थिरता के लिये त्रिकाल संध्या का अभ्यास कराया जाता है | वर्तमान में प्राचार्य श्री लक्ष्मीकान्त पाढ़ी जी के कुशल नेतृत्व में विधालय प्रगति की ओर अग्रसर है ,जिसमें उन्हें आचार्य श्री नित्यानंद जी (यजुर्वेद),आचार्य श्री विकास कुमार पाण्डेय जी (ऋग्वेद),आचार्य श्रीमनमोहन मिश्राजी (सामवेद) ,आचार्य श्री खेम राज रेग्मी (व्याकरण) ,कु०आकांक्षा शर्मा(अंग्रेजी),श्री मनोज गुप्ता जी (गणित) का पूर्ण सहयोग मिल रहा है | यहाँ से शिक्षा ग्रहण कर विधार्थी देश ही नहीं वरन विदेशों में भी उच्च पदों पर प्रतिष्ठित होकर विधालय को गौरवान्वित कर रहें हैं |

विधालय के संस्थापक श्रीमहंत नारायण गिरी जी का इस विधालय को स्थापित करने का उद्देश्य जन-मानस में वैदिक –सनातन-संस्कृति का प्रचार –प्रसार तथा सम्पूर्ण मानव –जाति को सनातन भारतीय संस्कृति तथा भारतीय साहित्य से अवगत करा कर अन्धविश्वास व समाज में फैली कुरीतियों को दूर करना है |